यमुना नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने के लिए प्रदूषण नियंत्रण और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके तहत नदी में गिरने वाले सीवेज को रोकने के साथ-साथ नालों की निगरानी और उपचार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

योजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता और संचालन की समीक्षा की जाएगी, ताकि बिना उपचारित पानी यमुना में न पहुंचे। पुराने और खराब सीवर नेटवर्क को दुरुस्त करने के साथ जरूरी स्थानों पर नई व्यवस्था विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

यमुना से जुड़े तालाबों, जलाशयों और अन्य जलस्रोतों के पुनरुद्धार का काम भी तेज किया जाएगा। इन जलस्रोतों की सफाई, जलभराव क्षमता बढ़ाने और आसपास के क्षेत्र को हराभरा बनाने के प्रयास किए जाएंगे।

प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की पहचान कर नियमित निगरानी की जाएगी। संबंधित विभागों को जिम्मेदारियां और समयसीमा तय कर काम की प्रगति की समीक्षा करने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

अधिकारियों का मानना है कि नदी की सफाई केवल अभियान तक सीमित न रहकर लगातार चलने वाली प्रक्रिया होनी चाहिए। सीवेज प्रबंधन, तालाबों का संरक्षण और जल गुणवत्ता में सुधार से यमुना के प्राकृतिक पर्यावरण को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

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