पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत सेप्सिस और सेप्टिक शॉक के इलाज को लेकर बड़ी संख्या में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा मिली है। योजना के तहत अब तक 12,467 उपचारों को कवर किया गया है, जिन पर करीब 51.58 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि सेप्सिस एक गंभीर स्थिति है, जिसमें शरीर संक्रमण के प्रति खतरनाक प्रतिक्रिया देने लगता है। इसकी समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है, क्योंकि कुछ मामलों में मरीज की हालत कुछ ही घंटों में गंभीर हो सकती है।
उन्होंने लोगों से तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, बहुत अधिक कमजोरी, भ्रम या तेजी से बिगड़ती तबीयत जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।
गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं प्रमुख डॉ. शशि कांत धीर ने बताया कि नवजात शिशुओं में सेप्सिस का खतरा अधिक रहता है। संक्रमण होने पर उनकी हालत तेजी से बिगड़ सकती है, इसलिए शुरुआती पहचान और तुरंत उपचार महत्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु
- 12,467 सेप्सिस उपचार योजना में कवर
- इलाज पर 51.58 करोड़ रुपये खर्च
- समय पर पहचान से गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है
- नवजात शिशु सेप्सिस के प्रति अधिक संवेदनशील


