गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक विशेष त्योहार है, वैसे तो ये त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र का गणपति पूजा विशेष रूप से प्रसिद्ध है, गणेश चतुर्थी का उत्सव सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पूरे भारत में एकता, संस्कृति और उल्लास का प्रतीक है। हर साल, इस दस दिवसीय महापर्व को देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी अनूठी परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है, गणेशजी को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता कहा गया है। हाथी का मुख होने के कारण उनका विशेष नाम गजानन पड़ा। गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करते थे क्योंकि वे उन्हें ही अपनी दुनिया मानते थे और इसलिए वे प्रथम पूज्य बन गये।
गणेश पूजा से काम होता मंगलमय– गणेश पुराण के अनुसार भगवान गणेश की प्रेरणा और आराधना से ही सृष्टि का आरंभ हुआ है। जो भक्त इनकी भक्ति पूर्वक पूजा अर्चना करते है भगवान गणेश उनके सभी दुखों और विघ्नों का हर लेते है। यही वजह है कि किसी भी शुभ काम में भी सबसे पहले गणेशजी की पूजा होती है, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और विघ्रहर्ता के रुप में जाना जाता है, किसी भी पूजा या शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश के पूजा का विधान है, ताकि जीवन में समृद्धी, सफळता और मंगल के साथ काम संपन्न हो, गणेश चतुर्थी यूं तो साल में 24 होती है, लेकिन इनमें भाद्र मास का शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। इस दिन पूरे देश में भगवान गणेश की पूजा होती है। लोग अपने घरों में गणेशजी की मूर्ति और तस्वीर सजाकर विशेष पूजा का आयोजन करते हैं
गणेश चतुर्थी क्यों मनाया जाता- ऐसी मान्यता है कि भाद्रमास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था, इसलिए भाद्रमास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे देश में गणपति बप्पा की धूम धाम से पूजा होती है,
कलंक चतुर्थी के रुप में भी मनाया जाता– भाद्र मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी के साथ ही देश के कुछ भागों में कलंक चतुर्थी मनाते हैं। इसकी एक कथा प्रचलित है कि गणेशजी ने अपने रूप पर अहंकार करने वाले चंद्रमा को शाप दे दिया था कि भाद्र मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को जो भी चंद्रमा को देखेगा उसे मिथ्या कलंक लगेगा, यानी जो उसने किया नहीं होगा उसके लिए भी दोषी ठहराया जाएगा। इससे बचने का एक मात्र तरीका है कि इस दिन गणेशजी के साथ चंद्रमा की भी पूजा करें और हाथ में फल, मिठाई या दही लेकर चंद्रमा का दर्शन करें। तभी आप गणेशजी के द्वार दिए गए शाप से बच सकते है। इसके साथ ही गणेश पूजा में दीपक का भी बहुत महत्तव हैं,
घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक- सनातन धर्म में कहा जाता है हर दिन घर में दीपक जलाने से घऱ में खुशहाली आती है, और हर दिन अगर घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं तो नकारात्मक उर्जा घर को छू नहीं पाएगी और अगर है भी तो वो घर से बाहर चली जायेगी, गणेश चतुर्थी के मौके पर शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जरूर जलाएं. जिससे घर की सुख-शांति बनी रहेगी. दीपक तेल, घी,तिल के तेल का हो सकता हैं,अपनी सुविधा अनुसार आप दीपक जला सकतें हैं,एक दीपक भगवान गणेश के चरणों के नीचे जलायें
तुलसी देवी के सामने जलाएं दीपक सनातन धर्म में तुलसी की पूजा-अर्चना का विशेष विधान है. अगर गणेश चतुर्थी की शाम को तुलसी पूजा करें और पौधे के सामने देसी घी का दीपक जलाएं तो बहुत लाभ होगा. इसके साथ ही सात या पांच बार तुलसी की परिक्रमा भी करें. ऐसा करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन की कमी कभी नहीं होती है.,और ज्यादा अपडेट के लिए बने रहिए हमारे साथ..आगे हम आपको गणेश उत्सव की प्रचलित कहानियां बतायेगे.

