चंडीगढ़, 17 जुलाई: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का राजनीति में एक सादा, जनता से जुड़ा और जमीन से उठता चेहरा अक्सर देखने को मिलता है। बुधवार की दोपहर, जब वह दिल्ली से चंडीगढ़ होते हुए शिमला की ओर सड़क मार्ग से लौट रहे थे, तब उनकी यह विशेषता एक बार फिर उस समय सामने आई जब उन्होंने अचानक कंडाघाट के पास देहूं चौकी में एक साधारण से ढाबे पर चाय पीने के लिए काफिले को रुकवा दिया।
ढाबे की चाय, गर्मजोशी से मिला स्वागत और विकास की ज़मीनी चर्चा
कंडाघाट पहुंचते ही मुख्यमंत्री का स्वागत वहां मौजूद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़े उत्साह के साथ किया। वरिष्ठ नेता रमेश ठाकुर के नेतृत्व में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उनका अभिवादन किया। लेकिन असली चौंकाने वाला क्षण तब आया, जब मुख्यमंत्री ने अचानक अपने काफिले को एक छोटे से ढाबे के सामने रुकवाया और बिना किसी औपचारिकता के वहीं बैठ गए।
ढाबे पर डीसी सोलन मनमोहन शर्मा, एसपी गौरव सिंह, कांग्रेस नेता जतिन साहनी, बादल नारंग, रोहित शर्मा सहित कई अन्य गणमान्य नेता भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने चाय की चुस्कियों के साथ ही सोलन जिले में चल रहे विकास कार्यों, बजट प्रावधानों और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की।
कंडाघाट क्षेत्र को मिलेगी नई सौगात – डे बोर्डिंग स्कूल का एलान
चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री सुक्खू ने बताया कि कंडाघाट क्षेत्र में एक अत्याधुनिक डे बोर्डिंग स्कूल के निर्माण के लिए 2 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर दी गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जाए और गुणवत्ता में कोई समझौता न हो।
साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सोलन विधानसभा क्षेत्र में कई और योजनाएं प्रगति पर हैं, जिनमें सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इन कार्यों की नियमित समीक्षा और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
मानसून में हुए नुकसान पर भी रही नजर
मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के दौरान मानसून के दौरान जिले में हुए नुकसान की रिपोर्ट भी मांगी और अधिकारियों को आवश्यक राहत कार्यों में तेज़ी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आमजन के हितों को सर्वोपरि रखते हुए प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए तत्पर है।
जनता के बीच, जमीन से जुड़ा नेतृत्व – यही है सुक्खू की शैली
ढाबे की सादगी और एक कप चाय के साथ सरकार की योजनाओं पर चर्चा करना शायद किसी नेता के लिए आम बात न हो, लेकिन मुख्यमंत्री सुक्खू के लिए यह कार्यशैली अब पहचान बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे सिर्फ मंचों से भाषण देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सड़क पर, ढाबे पर, और जनता के बीच रहकर प्रदेश की नब्ज़ को समझने और सुधारने में विश्वास रखते हैं।

