चंडीगढ़, 17 जुलाई: उत्तर प्रदेश का बलरामपुर जिला इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है विवादित मौलवी जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उनके कथित धर्मांतरण नेटवर्क पर लगातार हो रही कार्रवाई। सुरक्षा एजेंसियों की पैनी निगाहें अब उनके नजदीकी सहयोगियों पर टिकी हुई हैं, और इसी कड़ी में गुरुवार देर रात उनके भतीजे मोहम्मद सब्रोज को गिरफ्तार कर लिया गया।

रात एक बजे उतरौला में हुई गिरफ्तारी

मिली जानकारी के मुताबिक, स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की टीम गुरुवार को देर रात करीब 1 बजे उतरौला बस स्टॉप पर पहुंची। वहां पर मोहम्मद सब्रोज अपनी मोटरसाइकिल के पास खड़ा था। टीम ने उसे वहीं रोका, पूछताछ की और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। सब्रोज बलरामपुर के उतरौला थाना क्षेत्र के रेहरा माफी गांव का निवासी है, जहाँ छांगुर बाबा ने पहले अपनी पत्नी को दो बार चुनाव मैदान में भी उतारा था।

सबसे अहम बात यह है कि मोहम्मद सब्रोज का नाम पहले से ही एटीएस (ATS) द्वारा दर्ज एफआईआर में शामिल था। उसकी गिरफ्तारी के साथ ही अब छांगुर बाबा के पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगी हैं। STF और ATS अब पूरे मामले को विस्तार से जोड़ने में लगी हुई हैं और अन्य संभावित सहयोगियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।

गवाह पर हमला: डराने की कोशिशें नाकाम

यह मामला यहीं नहीं थमा। छांगुर बाबा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण गवाह हरजीत कश्यप पर पहले ही जानलेवा हमला हो चुका है। हरजीत ने छांगुर पर जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाया था। उन्होंने बताया कि 3 जुलाई को लखनऊ में उन्होंने बयान दर्ज करवाया, जिसके बाद 7 जुलाई को जब वह दवा लेने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जा रहे थे, तो उतरौला चौराहे के पास तीन लोगों — रियाज, कमालुद्दीन और नव्वाब — ने उन्हें रोका और बुरी तरह पीटा।

हमले के दौरान उनसे कहा गया कि “यह गाँव रसूलाबाद अब पाकिस्तान जैसा है, यहाँ रहकर मुसलमानों से बगावत की तो अंजाम भुगतना पड़ेगा।” साथ ही ये भी धमकी दी गई कि “योगी सरकार के बाद तुम्हारी बारी आएगी।”

पुलिस ने दर्ज किया मामला

हरजीत की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर लिया है। उतरौला कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह ने बताया कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

रमजान की भूमिका पर संदेह

जांच की अगली कड़ी में ATS की टीम गोंडा जिले के धानेपुर क्षेत्र स्थित रेतवागाड़ा गांव पहुंची। यहां छांगुर बाबा के एक और करीबी रमजान की तलाश की गई। रमजान पहले कव्वाली कार्यक्रमों में ढोलक बजाता था और इसी दौरान उसकी पहचान छांगुर से हुई थी।

ग्रामीणों का दावा है कि रमजान की मौत वर्ष 2024 में हो चुकी है, लेकिन ATS को शक है कि इसी नाम का कोई और व्यक्ति नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल इस एंगल पर जांच तेज़ कर दी गई है।

प्रशासन सख्त, कार्रवाई लगातार

पूरे मामले में प्रशासन बेहद गंभीर है। जबरन धर्मांतरण, गवाहों को धमकाने, और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के मामलों में छांगुर बाबा और उनके सहयोगियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। यह केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक बड़े संदिग्ध नेटवर्क की कड़ी से पर्दा उठाने की शुरुआत मानी जा रही है।

 

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