चंडीगढ़, 23 जून: भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक का मतदान करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है मतदाता सूची की शुद्धता और समय पर सूचना का संप्रेषण। इसी कड़ी में बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ), जो चुनावी तंत्र की सबसे ज़मीनी इकाई हैं, एक मौन लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री ए. श्रीनिवासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में बीएलओ की भूमिका रीढ़ के समान है। मतदाता सूची में संशोधन हो या नए मतदाताओं का नाम जोड़ना, वोटर स्लिप वितरित करना हो या बूथ स्तर पर मतदाता जागरूकता बढ़ाना — हर मोर्चे पर बीएलओ सबसे आगे रहते हैं।

बीएलओ को सशक्त बनाने के लिए राष्ट्रीय प्रशिक्षण अभियान प्रारंभ

भारत निर्वाचन आयोग ने बीएलओ को और अधिक दक्ष बनाने के उद्देश्य से भारत अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र चुनाव प्रबंधन संस्थान (IIDEM), नई दिल्ली में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। इसी क्रम में आज मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने बीएलओ प्रशिक्षण के 13वें बैच का विधिवत उद्घाटन किया।

इस बैच में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, मेघालय, नागालैंड और चंडीगढ़ जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश से आए कुल 379 बीएलओ और पर्यवेक्षक (सुपरवाइज़र) भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि अत्यंत व्यावहारिक और तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।

तीन माह में 5000+ बीएलओ को मिल चुका है प्रशिक्षित मार्गदर्शन

मुख्य निर्वाचन अधिकारी श्री ए. श्रीनिवासन ने जानकारी दी कि पिछले तीन महीनों में पूरे भारत से 5000 से भी अधिक बीएलओ और सुपरवाइज़रों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। यह प्रशिक्षण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, मतदाता पंजीयन नियम 1960, चुनाव संचालन अधिनियम 1961 तथा भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर आधारित है।

प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य बीएलओ को इस काबिल बनाना है कि वे निर्वाचन प्रक्रिया को तकनीकी, व्यावहारिक और विधिक रूप से सही ढंग से निष्पादित कर सकें

तकनीकी दक्षता को मिल रहा विशेष बल

इस आधुनिक युग में चुनावी प्रक्रिया सिर्फ कागज़ी कार्यों तक सीमित नहीं रही। अब ईवीएम, वीवीपैट, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन पंजीकरण जैसे डिजिटल टूल्स का बड़ा महत्व है। इसी के मद्देनज़र बीएलओ को इस प्रशिक्षण में ईवीएम, वीवीपैट, मॉक पोल और आईटी संसाधनों के संचालन में दक्ष बनाया जा रहा है।

उन्हें विभिन्न प्रकार के मतदाता फॉर्म की समीक्षा, मतदाता सूची के अपडेट, शिकायत निवारण, और चुनावी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर सुरक्षित व प्रभावी ढंग से संचालित करने की विधियां सिखाई जा रही हैं।

बीएलओ – लोकतंत्र के धरातल पर डटे योद्धा

अक्सर चुनाव के सफल संचालन का श्रेय उच्च अधिकारियों और आयोगों को मिलता है, लेकिन असली कार्य तो बीएलओ जैसे ज़मीनी कार्यकर्ताओं के ही कंधों पर होता है। वे ही गांव-गांव, गली-गली जाकर मतदाताओं को जागरूक करते हैं, उनके नाम सूची में दर्ज कराते हैं, और मतदान केंद्र तक की हर जानकारी पहुंचाते हैं

श्री श्रीनिवासन ने बीएलओ को चुनाव प्रक्रिया के सबसे जरूरी स्तंभों में से एक बताते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण उन्हें न केवल और अधिक सक्षम बनाएगा, बल्कि आगामी चुनावों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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