चंडीगढ़, 28 जून: दिल्ली की सरकार ने शराब की बिक्री को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। अब राजधानी में केवल सरकारी एजेंसियों द्वारा संचालित दुकानें ही शराब बेच सकेंगी। यह निर्णय मौजूदा आबकारी नीति को मार्च 2026 तक बढ़ाए जाने के साथ लागू होगा।
सरकार की तरफ से यह साफ किया गया है कि नई आबकारी नीति पर काम जारी है, लेकिन जब तक वह अंतिम रूप में नहीं आ जाती, तब तक पुरानी नीति की व्यवस्था को ही आगे बढ़ाया जाएगा। यानी दिल्ली में अभी जो मॉडल 2022-23 से चल रहा है, वही अगले नौ महीनों तक लागू रहेगा।
नई नीति नहीं, फिलहाल पुरानी ही लागू रहेगी
दिल्ली सरकार ने कहा है कि नई नीति को बेहतर, पारदर्शी और दीर्घकालिक बनाने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। लेकिन, उस नीति को बनाने और लागू करने में वक्त लग सकता है। इस बीच, आपूर्ति में कोई रुकावट न आए और प्रशासनिक प्रक्रिया बाधित न हो, इसके लिए मौजूदा लाइसेंस व्यवस्था को ही अगले वित्तीय वर्ष तक बढ़ाया गया है।
लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता
लाइसेंसधारकों के लिए राहत की बात यह है कि लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया को पहले जैसा ही रखा गया है:
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अगर कोई विक्रेता 30 दिन के भीतर आवेदन करता है, तो उसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
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30 से 60 दिन की देरी पर 25% अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
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और 60 दिन से ज्यादा देरी करने पर 100% अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा।
यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि समयबद्धता, पारदर्शिता और अनुशासन बना रहे।
फिलहाल दिल्ली की 792 शराब दुकानें चार सरकारी एजेंसियों के अधीन
वर्तमान में दिल्ली की शराब बिक्री व्यवस्था चार प्रमुख सरकारी निगमों के ज़रिए संचालित हो रही है:
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दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं ढांचागत विकास निगम (DSIIDC)
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दिल्ली उपभोक्ता सहकारी थोक स्टोर (DCCWS)
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दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (DTTDC)
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दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (DSCSC)
इन्हीं चार एजेंसियों को अगले नौ महीनों तक दुकान संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
इस फैसले के पीछे सरकार की रणनीति स्पष्ट है —
“नई नीति को बनाने में जल्दबाजी न हो, और जब तक वह लागू नहीं होती, तब तक पुरानी व्यवस्था बिना किसी व्यवधान के चलती रहे।”
यह कदम इसलिए भी जरूरी था ताकि शराब की आपूर्ति बनी रहे, काला बाज़ारी और निजी अनियमितता से बचा जा सके, और नई नीति को पूरी तरह से सोच-समझकर और जवाबदेही के साथ लागू किया जा सके।

