अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी को छावनी में बदल कर रख दिया है. नेशनल गार्ड्स की तैनाती के बाद अब लोग राष्ट्रपति ट्रंप से नाराज हैं. बुधवार को शहर के एक व्यस्त इलाके 14वीं स्ट्रीट नॉर्थवेस्ट में लोग सड़कों पर उतर आए. लोग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की उस घोषणा के बाद सड़कों पर आए, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अब शहर की पुलिस को अपने कब्जे में लेगी और नेशनल गार्ड की तैनाती बढ़ाएगी. आपको बतादे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए वॉशिंगटन डी.सी. की पुलिस का नियंत्रण संघीय सरकार के हाथ में ले लिया और शहर की सड़कों पर 800 नेशनल गार्ड सैनिक तैनात करने की घोषणा की। यह कदम स्थानीय नेताओं के विरोध और कानूनी सवालों के बावजूद उठाया गया है। ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अब बड़े और साहसी कदम उठाने का समय आ गया है। डी.सी. से शुरुआत कर रहे हैं, लेकिन यह आगे भी जाएगा।”
वॉशिंगटन डीसी की सड़कों पर अचानक नेशनल गार्ड की तैनाती हो जाती है. राजधानी वाशिंगटन के लोग चौंकते हैं, डरते हैं, कयास लगने लगते हैं कि क्या कोई हमला हुआ है? कोई दंगा? कोई इमरजेंसी? लेकिन हैरानी की बात ये है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. ये सब हुआ बस एक आदेश से, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अचानक लिए गए फैसले से, जिसमें उन्होंने बिना किसी सार्वजनिक चेतावनी के 800 नेशनल गार्ड को राजधानी की सड़कों पर उतार दिया. नेशनल गार्ड को सड़क पर उतारना अमेरिका में एक बड़ा कदम माना जाता है. ऐसा आमतौर पर सिर्फ बहुत ही गंभीर स्थितियों में किया जाता है. जैसे, 2020 में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के दौरान जब देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए. 2021 में कैपिटल हिल पर हुए हमले के बाद सुरक्षा के लिए, 1968 में मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्या के बाद हिंसा भड़की. इन सभी मामलों में हालात वाकई बेकाबू थे. लेकिन अभी ऐसा कुछ भी नहीं है, न दंगे, न हमले, न कोई ताजा खतरा. तो फिर राष्ट्रपति ट्रंप का ये फैसला सामान्य नहीं कहा जा सकता. एक बात तो साफ है कि जब शांति हो और फिर भी सड़कों पर सेना दिखे, तो सवाल उठते हैं. अब आगे देखना ये होगा कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले के पीछे की असल वजह कब और कितनी पारदर्शिता से सामने लाता है.

