चंडीगढ़, 26 जून: हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून की शुरुआत ने अपनी दस्तक के साथ ही तबाही की एक गहरी छाप छोड़ दी है। 24 जून को प्रदेश में मानसून की पहली बारिश हुई, लेकिन इसके अगले ही दिन, 25 जून को जो मंजर सामने आया, उसने लोगों के दिलों को दहला दिया। कुल्लू और कांगड़ा जैसे पहाड़ी जिलों में एकाएक आई भारी बारिश, बादल फटने और बाढ़ की घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। इस भीषण प्राकृतिक आपदा ने न केवल लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया, बल्कि कई परिवारों को अपूरणीय क्षति भी पहुंचाई।
बुधवार को महज चौबीस घंटों में हिमाचल के पांच अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनके कारण अचानक तेज बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आ गई। इस आपदा में कई मकान पूरी तरह से बह गए, पुल ढह गए और गाड़ियां पानी में तिनकों की तरह बहती नजर आईं। अब तक मिली जानकारी के अनुसार इस त्रासदी में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ लोग अब भी लापता हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि राज्य सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है और मौसम विभाग ने 28 और 29 जून को भी भारी बारिश की चेतावनी देते हुए ‘ऑरेंज अलर्ट’ घोषित किया है।
कुल्लू जिले के सैंज इलाके से एक बेहद दर्दनाक समाचार सामने आया है। यहां बादल फटने के बाद आई बाढ़ की चपेट में आकर एक पिता, उनकी बेटी और एक महिला बह गए। अब तक इनका कोई सुराग नहीं मिला है। इसी तरह, धर्मशाला के पास खनियारा क्षेत्र में स्थित मगूणी खड्ड में एक हाइड्रो प्रोजेक्ट के मजदूरों के बहने की सूचना ने हड़कंप मचा दिया। शुरू में कहा गया कि लगभग 15-20 मजदूर लापता हैं, लेकिन बाद में जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कुल 8 लोग बाढ़ की चपेट में आए थे, जिनमें से अब तक 2 शव बरामद कर लिए गए हैं।
इन आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में सबसे भयानक दृश्य कुल्लू जिले के सैंज, बंजार, तीर्थन, मनाली के सोलांगनाला और मणिकर्ण घाटी में देखने को मिले। यहां पहाड़ी इलाकों में बादल फटने से नदियों और नालों में अचानक तेज उफान आ गया। सैंज में जीवा नाले में आई बाढ़ ने आसपास के इलाके को तबाह कर दिया। हाइड्रो प्रोजेक्ट में बने मजदूरों के शेड बह गए, और एक मकान भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गया। इस मकान में रह रहे पिता, बेटी और एक रिश्तेदार का अब तक कुछ पता नहीं चला है। गनीमत रही कि परिवार के अन्य सदस्य बाल-बाल बच गए।
इस त्रासदी पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने संदेश में कहा कि हिमाचल के विभिन्न इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ से जो जान-माल का नुकसान हुआ है, वह अत्यंत दुःखद है। उन्होंने लापता लोगों की सुरक्षित वापसी की आशा जताई और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि इस मुश्किल घड़ी में हमें एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा और मिलकर इस आपदा से निपटना होगा। साथ ही उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे राहत और बचाव कार्यों में प्रशासन की हर संभव मदद करें।
प्रशासन और आपदा राहत दल इस समय चौबीसों घंटे मोर्चे पर डटे हुए हैं। प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से चलाए जा रहे हैं। हेलीकॉप्टर और आधुनिक संसाधनों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। वहीं, स्थानीय निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
कुल्लू के डीसी तारुल रविश ने जानकारी दी कि फिलहाल बाढ़ और बारिश से हुए नुकसान का जो प्रारंभिक आकलन किया गया है, उसके अनुसार करीब 50 से 60 लाख रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि असली नुकसान का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है। सैलानियों की सुरक्षा को लेकर विशेष कदम उठाए गए हैं और सभी को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है, क्योंकि मौसम विभाग ने आगामी 27 और 28 जून को फिर से भारी बारिश की संभावना जताई है।
हिमाचल की यह आपदा हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस तरह प्रकृति का संतुलन जब बिगड़ता है, तो उसका असर सबसे पहले पर्वतीय क्षेत्रों पर पड़ता है। पहाड़ों में रहने वाले लोगों की जिंदगी हमेशा प्रकृति के इशारों पर चलती है, और जब यह इशारा विनाश की ओर हो, तो तबाही निश्चित हो जाती है। यह समय एक-दूसरे की मदद करने का है, और यह सुनिश्चित करने का भी कि हम मिलकर इस त्रासदी से न केवल उबरें, बल्कि भविष्य में इससे बेहतर तरीके से निपटने के लिए भी तैयार रहें।

