चंडीगढ़, 19 जून: ईरान और इज़राइल के बीच हाल ही में बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध जैसे माहौल के चलते पूरे पश्चिम एशिया में एक डर और अनिश्चितता का वातावरण बन गया है। ऐसे माहौल में भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और ‘ऑपरेशन सिंधु’ नामक विशेष राहत अभियान की शुरुआत की है। इस ऑपरेशन के तहत, सरकार का मुख्य उद्देश्य ईरान में फंसे हजारों भारतीय नागरिकों, खासकर छात्रों, को सुरक्षित रूप से भारत वापस लाना है।
इस अभियान की पहली बड़ी सफलता गुरुवार को देखने को मिली, जब ईरान में फंसे 110 भारतीय नागरिक – जिनमें ज़्यादातर छात्र थे – दिल्ली एयरपोर्ट पर सकुशल पहुंचे। इन छात्रों की वापसी के साथ-साथ उनके साथ बीते दिनों की भयावह कहानियाँ भी सामने आई हैं, जिन्होंने लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए।
मिसाइलों के बीच जागी रातें और डर की जिंदगी
दिल्ली पहुंचे छात्रों ने पत्रकारों से बात करते हुए ईरान में बिताए गए पिछले कुछ हफ्तों को अपने जीवन का सबसे डरावना अनुभव बताया। एक मेडिकल छात्र यासिर गफ्फार ने कहा, “रात के सन्नाटे में जब ऊपर से मिसाइलें उड़ती थीं और आसमान धमाकों से गूंज उठता था, तब हर पल ऐसा लगता था कि अगला धमाका कहीं हमारे पास न हो जाए। नींद गायब हो गई थी। लेकिन जब भारत की ज़मीन पर पैर रखा, तो जैसे पूरी आत्मा को सुकून मिल गया।”
एक अन्य छात्रा ने बताया कि कई बार रात भर बंकरों में छिपकर बिताना पड़ा, और विश्वविद्यालय प्रशासन की मदद से ही उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया। धीरे-धीरे छात्रों को उत्तरी ईरान के इलाकों से आर्मेनिया ले जाया गया, जहाँ से उन्हें कतर के रास्ते भारत लाया गया।
विदेश मंत्रालय की बड़ी चुनौती – 4,000 नागरिक, 2,000 छात्र अब भी ईरान में
भारत सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल ईरान में करीब 4,000 भारतीय नागरिक मौजूद हैं, जिनमें आधे से ज़्यादा यानी लगभग 2,000 छात्र हैं। इन छात्रों की सुरक्षा और वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारत ईरान और पड़ोसी देश आर्मेनिया के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है। अभी तक उत्तरी ईरान के क्षेत्रों से कुल 110 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
मेडिकल यूनिवर्सिटीज से चरणबद्ध निकासी
विदेश मंत्रालय ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आज़ाद यूनिवर्सिटी और ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के सभी भारतीय छात्रों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों को तेहरान के पास कोम शहर की ओर रवाना किया गया है। वहीं, शिराज और इस्फहान की यूनिवर्सिटियों से छात्रों की निकासी मंगलवार तक जारी रही। कुछ छात्रों को अस्थायी रूप से सुरक्षित होटलों और दूतावास द्वारा तय किए गए आश्रयों में ठहराया गया है, जहाँ उन्हें भोजन, मेडिकल सहायता और इमरजेंसी सेवाएँ मुहैया कराई गई हैं।
सरकार की अपील – सतर्क रहें, दूतावास से जुड़े रहें
भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने सभी ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे सतर्क रहें, ज़रूरत पड़ने पर तेहरान जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से बाहर निकलें, और भारत दूतावास या नई दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम के संपर्क में लगातार बने रहें। भारतीय दूतावास और मंत्रालय का कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय है।
परिजनों की आंखों में आंसू, सरकार के प्रति आभार
जब दिल्ली एयरपोर्ट पर छात्रों के परिवारजनों ने उन्हें गले लगाया, तो भावनाओं का सैलाब फूट पड़ा। कई माता-पिता अपने बच्चों को देखकर फूट-फूट कर रो पड़े। एक छात्र के पिता ने कहा, “मेरा बेटा एमबीबीएस कर रहा था, और जब ईरान में हालात बिगड़े, तब हर दिन दिल बैठा जा रहा था। अब वो मेरे सामने सुरक्षित खड़ा है, इसके लिए मैं भारत सरकार का दिल से आभार व्यक्त करता हूं।”
छात्रों की उम्मीद – हालात सामान्य हों तो लौटेंगे वापस
छात्रों ने सरकार के त्वरित और साहसिक प्रयासों की सराहना की, लेकिन यह भी बताया कि उन्होंने अपने करियर और सपनों को अब भी नहीं छोड़ा है। एक छात्रा ने कहा, “हम अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं। जैसे ही हालात ठीक होंगे, हम वापस ईरान जाकर पढ़ाई जारी रखेंगे। लेकिन अभी सबसे ज़रूरी चीज है – ज़िंदा रहना और सुरक्षित रहना।”

