Camp will organize for colonizers : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार शहरी नागरिकों और कालोनाइज़रों के लंबित कार्यों के निपटारे के लिए पहली बार 16 अक्टूबर को एक विशेष कैंप आयोजित कर रही है।

इस कैंप में कम से कम 50 मामलों का निपटारा कर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।

यह जानकारी आवास निर्माण और शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह मुंडिया ने पंजाब भवन, चंडीगढ़ में कालोनाइज़रों के महासंघ के साथ बैठक के दौरान दी।

Camp will organize for colonizers : कालोनाइज़रों और शहरी निवासियों के लंबित मामलों

स. मुंडिया ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, कालोनाइज़रों

और शहरी निवासियों के लंबित मामलों को समयबद्ध सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि इस पहले कैंप के बाद, नवंबर के अंत में एक और कैंप आयोजित किया जाएगा,

जिसमें अधिकतम लंबित मामलों का निपटारा करने का प्रयास किया जाएगा।

अधिकारी द्वारा कालोनाइज़रों से रिश्वत की मांग

मंत्री ने यह भी कहा कि यदि किसी अधिकारी द्वारा कालोनाइज़रों से रिश्वत की मांग की जाती है,

तो इसकी शिकायत तुरंत विभाग की ईमेल transparency.hud@gmail.com पर भेजी जाए।

उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं

कि शहरी निवासियों और कालोनाइज़रों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए।

श्री मुंडिया ने राज्य सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई कर रही है

और 18 से 29 अक्टूबर तक सरकारी संपत्तियों की दूसरी नीलामी शुरू की जाएगी।

उन्होंने रियल एस्टेट के विकास में पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखने की बात कही।

हर महीने मामलों की क्लियरेंस के लिए कैंप

विभाग के सचिव राहुल तिवारी ने बताया कि विभाग के सार्वजनिक कार्यों के लिए हर महीने मामलों की क्लियरेंस के लिए कैंप लगाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि अब तक 1000 लंबित मामलों में से केवल 100 ही बचे हैं,

जिन्हें जल्दी ही निपटाने का लक्ष्य है।

महासंघ ने कैबिनेट मंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें सम्मानित किया।

उन्होंने सरकार द्वारा आयोजित पहले कैंप की सराहना की और मंत्री का धन्यवाद किया।

मंत्री ने कहा कि कालोनाइज़रों की मांगों और फीडबैक के लिए ऐसी बैठकें लगातार की जाएंगी।

बैठक में गमाडा के सीए मोनीश कुमार, पुडा के सीए और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डायरेक्टर नीरू कात्याल गुप्ता, और पुडा के एसीए इनायत भी उपस्थित थे

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